Depression

“चिंता” ही  “चिता” हे ! आज हर उम्र का , हर जाती का, हर वर्ग का शरीर का  मानसिक तनाव अपने चरम सीमा पर हे ! कोई धन से दुखी हे, कोई इज्जत से दुखी हे, कोई पद प्रतिष्ठा के कारन दुखी हे, कोई बेरोजगारी से दुखी हे, कोई पारिवारिक क्लेश से दुखी हे, कोई शारीरिक दुखी हे, कोई अपने बच्चो से दुखी हे, कोई अपने माता पिता से दुखी हे!

परिणाम में दुःख ही दुःख हे, जबकि सत्य सिर्फ इतना सा हे कि दुःख शब्द जेसा वास्तव  में तो कुछ हे ही नहीं, यह सिर्फ और सिर्फ मानसिक विचारो और परिस्थितियों के ताल मेल की गड़बड़ मात्र हे ! कारण यह कि आज के इंसान के पास होश नही सिर्फ जोश बचा, बुद्धि नहीं सिर्फ बुद्धि  का विनाश बचा हे और परिणाम में दुःख ही दुःख !

अगर आपके जीवन में भी कुछ ईएसआई समस्या हे जिसका हल निराकरण आपको नही मिल पा रहा और समस्याओं के कारण ठगी के शिकार के साथ जीवन भी खत्म होने कि कगार पर हे तो आप अधिकतर सो शब्दों में हमे आपकी परिस्थिति सहित समस्या भेज सकते हे! १५ दिन के अंतर्गत आपकी समस्या का वास्तविक कारण आप तक पहुँचा दिया जायेगा !