गीता में कहा हे जो जन्मता हे वह मरता हे जो मरता हे वह फिर जन्मता हे, जो जन्मता हे वह जीता भी हे, जो जीता हे, वह सुख और दुःख भी भोगता हे, जो भोगता हे वह ही महसूस कर सकता हे कि उसकी स्थिति क्या हे या क्या हो रही हे, लेकिन कोई यह नही सोचता कि आखिर  यह सब सुख दुःख का वास्तविक रहस्य क्या हे ? कहीं कर्मो का ही फल तो नहीं मिलता ?

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