इस संसार में आज जितने भी मनुष्य – कीड़े मकोड़े – सभी जल में रहने वाले जंतु – सभी पृथ्वी पँर रहने वाले जीव जंतु, कोई ईश्वर या अल्लाह की बिना बात की सजा नहीं भुगत रहे, बल्कि ससत्य सिर्फ यह हे की सभी अपने अपने कर्मो के अनुइसार फल और दूकः सुख भुगत रहे हे. इंसानी शरीर सिर्फ और सिर्फ 
से कर्मो और शरीर से जुड़े वर्ष तक का होता हे , लेकिन मनुष्य कई बार पैदा होता हे, कीड़े मकोड़े, कई बुरी बुरी परिस्थितियों में पैदा हिओते और मंर्ति हे, ययः सब उनके उन्ही कर्मो का फल हे, जब वह मनुष्य थे, तब तो शास्त्रों में लिखा हुआ नहीं मानते और मरने के बाद वही मनुष्य कीड़े मकोड़े और अन्य कई प्रकार के गन्दी और बेहद दुखद शरीर लेकर कई कई सालो तक अपने पाप कर्मो की सजा भुगत रहे हे, और अगर कर्म फल पर ध्यान नहीं दिया तो, हमारे साथ ही हमारी आने वाली पीढ़ियों की बर्बादी के जिम्मेदार भी हम ही होंगे, समस्त धर्मो के यानुसार कर्म फल की संपूर्ण परिभाषा अतिशीघ्र प्रकाशित.. जिसमे इस  संसार की परिभाषा, प्रत्येक धर्म के अनुसार अलग अलग जरूर हे, लेकिन परिणाम सभी का सिर्फ एक ही..अच्छे का फल अच्छा ..बुरे का फल बेहद बुरा,,, 
कर्म फल प्रत्येक जीवित मनुष्य की अत्यंत जरुरी आवश्यकता हे, जिसे समझे बिना इंसां कभी भी दुःखो स मुक्त ओ ही नहीं सकता, यह अटल सत्य हे, और जो नै पीढ़ी और नशे में चूर शैतान मनुष्य इन बातों में विश्वासः नहीं करता हे, वह सिर्फ जिन्दा होने तक ही अपनी अकड़ में रह सकता हे, मौत के बाद तो उसको मानना ही मानना पड़ेगा !
समझदार बनने में ही मात्र समझदारी हे !